संगठन हो या सरकार हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हैं विपिन सिंह परमार!!

हिमाचल प्रदेश,12 दिसंबर 2020:

रिपोर्ट अमन सूद :

विपिन सिंह परमार मौजूदा समय में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष हैं। परमार पूर्व मुख्यमंत्री एवं हिमाचल भाजपा के शीर्ष नेताओं में शुमार शांता कुमार की कर्मस्थली कहे जाने वाले सुलह विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। शांता कुमार की कर्मस्थली की विरासत को विपिन सिंह परमार उच्च आदर्शों और स्वच्छ राजनीति के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। यही कारण है कि विपिन सिंह परमार का राजनीतिक जीवन बेदाग है। इस सरकार में बतौर स्वास्थ्य मंत्री उनका कार्यकाल सराहनीय और यादगार बना है तो वहीं बतौर विधानसभा अध्यक्ष भी वह अपनी भूमिका बाखूबी निभा रहे हैं। बात करें सुलह विधानसभा क्षेत्र की तो परमार की कुशल कार्यप्रणाली के कारण यह क्षेत्र लगातार विकास के नए आयाम छू रहा है। मूलभूत सुविधाओं की बात करें या फिर भविष्य की योजनाओं की परमार की दूरदर्शी सोच और जनकल्याण की भावना सुलह विधानसभा क्षेत्र में हुए विकास से झलकती है।

कंचन सिंह परमार के घर गांव ननाओं, तहसील पालमपुर, जिला कांगड़ा हिमाचल प्रदेश में 15 मार्च, 1964 को विपिन सिंह परमार का जन्म हुआ।  विपिन सिंह परमार बाल्यकाल से ही कुशाग्र बुद्धि थे। परमार ने आरम्भिक शिक्षा केन्द्रीय विद्यालय, योल धर्मशाला से हासिल की। उसके पश्चात कॉलेज स्तर की शिक्षा राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला जबकि उच्च शिक्षा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से एलएलबी के रूप में पूर्ण की। परमार ने कॉलेज में ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् की सदस्यता ग्रहण की तथा पूर्णकालिन एबीबीपी कार्यकर्ता रहते हुए वर्ष 1980 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में एबीवीपी के कैंपस प्रेजिडेंट बने। परमार लगातार 8 वर्षों तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् हिमाचल प्रदेश के संगठन सचिव रहे। तत्पश्चात कांगड़ा-चम्बा युवा मोर्चा के अध्यक्ष बनाये गये। उसके पश्चात परमार कांगड़ा के भारतीय जनता पार्टी के महासचिव पद पर तैनात रहे। उसके पश्चात परमार को उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें जिला कांगडा भारतीय जनता पार्टी का  अध्यक्ष बनाया  गया। परमार प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष पद पर भी तैनात रहे तथा उन्हें कांगडा-चम्बा संसदीय क्षेत्र का भी प्रभारी बनाया गया। परमार वर्ष 1980 से आरएसएस स्वंय सेवक के रूप में कार्य कर रहे है।

परमार 1998 में सुलह निर्वाचन क्षेत्र से प्रथम बार हिमाचल प्रदेश विधान सभा सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए तथा हिमाचल प्रदेश खादी बोर्ड के अध्यक्ष बनाये गये। परमार वर्ष 1999 से 2003 तक राज्य खादी बोर्ड के अध्यक्ष रहे। विपिन सिंह परमार वर्ष 2007 में पुन: सुलह निर्वाचन क्षेत्र से विधान सभा के लिए निर्वाचित हुए। तत्पश्चात परमार दिसम्बर, 2017 में तीसरी बार हिमाचल प्रदेश विधान सभा सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए तथा 27 दिसम्बर, 2017 को हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य मन्त्री परिषद में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, आयुर्वेद और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  मंत्री के रूप में शामिल किए गए। परमार 25 फरवरी, 2020 तक इस पद पर रहे तथा 26 फरवरी, 2020 को सर्वसम्मति से हिमाचल प्रदेश विधान सभा के 17वें अध्यक्ष के रूप में चुने गये। परमार को हिन्दी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं का ज्ञान हासिल है। परमार की पाठन, लेखन तथा संगीत में भी गहरी अभिरूचि है।

सुलह विधानसभा क्षेत्र सहित प्रदेश और पार्टी की जो भी जिम्मेदारी विपिन सिंह परमार को सौंपी गई है उन्होंने पूरी ईमानदारी से उसका निर्वहन किया है और उच्च आदर्श कायम किए हैं। यही कारण है कि अब सुलह विधानसभा क्षेत्र में विपिन सिंह परमार का कोई विकल्प नजर नहीं आता। उनकी पार्टी के लोग उन्हें अपना नेता मानते हैं तो विरोधी पार्टी में भी कोई ऐसा चेहरा नहीं है जो कि परमार के बढ़े हुए कद के सामने टिकता हो। इस सरकार का तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा हो रहा है और इन तीन वर्षों में परमार ने अपनी काबिलियत का लोहा अपनी पार्टी में भी और अपने विधानसभा क्षेत्र में भी मनवाया है। तीन साल में सुलह विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों रुपए के विकास कार्य शुरू हुए हैं। परमार ने सुलह में विकास की नई गाथा इस कार्यकाल में शुरू की है और यही कारण है कि सुलह विधानसभा क्षेत्र के लोगों को अब परमार से उम्मीदें भी बहुत ज्यादा हैं।

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